कुछ ऐसी है हमारी संस्कारधानी जबलपुर

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आप कहां से हैं?……………………… यह मेरा अपना शहर जबलपुर मध्य प्रदेश

    hi everyone !  मेरा नाम लतिका कपूर है मेरा HomeTown जबलपुर है , मैंने MBA 2016  में  जबलपुर  से  ही  complete  किया  after  that मैंने  अपना  Job TOURS  & TRAVELS  company  में  join  किया  जिसका Head office  यहाँ  जबलपुर  में  है  और  उनके  दो  Resorts  एक  कान्हा  में  और  दूसरा  बांधवगढ़  NATIONAL PARK  MP TOURISM  में  स्थित  है  अक्सर  हम  National Park  घूमने  जाया  करते  थे ,Job के  दौरान  मुझे  लगा  की  मैं  कई  नयी- नयी जगह  घूमना  चाहती  हूँ ,बचपन  में  family  के  साथ   मैंने   कई  tours complete  किये  और  मेरा  नयी  जगह  घूमने  का  interest  फिर  से  बढ़ने  लगा ,मैंने अपना  नया Page शुरू  किया  है जिसका  नाम “Travel  with Latika ” दिया  है , I have started this  page because I  love to  explore and  capture  the  moments . जिसमे  मैं  अपनी trips, tips, information और  अपने  experience share  करुँगी  जिसकी  शुरुआत  मैं  अपने  शहर  से  करना  चाहती  हूं so make sure you are connected with me for future updates.

          Thanks for your support.

जबलपुर के कुछ मुख्य पर्यटन स्थल

  • धुआँधार वॉटरफॉल
  • चौंसठ योगिनी
  • त्रिपुर सुंदरी मंदिर
  • मदन महल किला
  • बैलेंसिंग रॉक
  • रानी दुर्गावती संग्रहालय
  • पिसनहारी की मढ़िया
  • डुमना नेचर पार्क
  • ग्वारीघाट(नर्मदा घाट)
  • कचनार सिटी शिव मंदिर
  • बरगी बांध(डैम)

धुंआधार वॉटरफॉल

पर्यटकों के लिए धुआंधार जलप्रपात सबसे मुख्य है यह नाम धूर्ण और धार मतलब प्रवाह संयोजन से है। झरना भेड़ाघाट पर स्थित है जो कि जबलपुर से लगभग 30 किलोमीटर दूर है। नर्मदा नदी पर स्थित झरना 30 मीटर ऊंचा और देखने में बहुत ही आकर्षक है। यहां आने का सबसे सही समय शरद पूर्णिमा (सितंबर से अक्टूबर) के दौरान होता है जब यहां अति प्रसिद्ध नर्मदा महोत्सव मनाया जाता है। जब आप यहां पहुंचेंगे तो आप घाट से बंदर कूदनी, संगमरमर कि सफ़ेद चट्टानों का लुफ्त उठा सकते हैं यहां कई बॉलीवुड फिल्म 1947 प्राण जाए पर वचन ना जाए,2001 अशोका (शाहरुख खान एवं करीना कपूर) ,2016 मोहनजोदड़ो (रितिक रोशन) जैसे कई प्रसिद्ध फिल्मों का शूट हुआ है।

चौसठ योगिनी मंदिर

10 वीं शताब्दी ईस्वी में बनाया गया चौसठ योगिनी मंदिर, धुआंधार से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। वहाँ तक पहुंचने के लिए 150 से अधिक सीढ़ियां चढ़ने पड़ती हैं। सूर्य की रोशनी में 64 मूर्तियों के बीच अंदर भगवान शिव और उनकी पत्नी देवी पार्वती नंदी पर सवार मुख्य मंदिर में दिखाई देती हैं। आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा है यह जबलपुर में शासन करने वाले प्राचीन राजवंशों के बारे में बहुत कुछ बतलाता है।

त्रिपुर सुंदरी मंदिर

त्रिपुर सुंदरी मंदिर जबलपुर से 15 किलोमीटर दूर भेड़ाघाट मार्ग पर तेवर गांव में स्थित है यह सबसे महत्वपूर्ण स्थान है 11 वीं शताब्दी में निर्मित यह माना जाता है कि मंदिर में स्थित मूर्ति जमीन से निकली है, त्रिपुर का शाब्दिक अर्थ तीन शहर और सुंदरी का अर्थ सुंदर दे दिया अर्थात मंदिर के अंदर माता महाकाली माता महालक्ष्मी और माता सरस्वती की विशाल मूर्ति से संबोधित किया जाता है।

मदन महल किला

मदन महल ऐतिहासिक दुर्गावती किले के लिए प्रसिद्ध जबलपुर का एक मुख्य आकर्षण रहा है इस क्षेत्र में मदन महल नाम नाम का रेलवे स्टेशन भी है।

           रानी दुर्गावती ने 1550 से 1565 तक गोंडवाना में शासन किया। उनका शहादत दिवस( 24 जून 1564) आज भी “ बलिदान दिवस” के रूप में मनाया जाता है।

           जबलपुर शहर में एक पहाड़ी के ऊपर जो कि लगभग 500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक किला है। जिसमें शासकों के स्थिर युद्ध कक्ष, छोटे जलाशय और मुख्य सुख कक्ष पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

बैलेंसिंग रॉक

मदन महल के किले के बहुत करीब एक चट्टान एक विशाल आधार चट्टान पर संतुलित है और इसे केवल थोड़ा सा छूती है। दोनों चट्टानों के बीच संपर्क बिंदु केवल 6 वर्ग इंच है। ऐसा माना जाता है कि इन चट्टानों का संतुलन बिगड़ना असंभव है।कई पर्यटक और भूवैज्ञानिक इस जगह को देखने और समझने आते हैं स्थानीय लोगों का मानना है कि यह चट्टाने अजय हैं क्योंकि वह अविश्वसनीय है? यद्यपि वे निश्चित रूप से तैनात दिखते हैं।

रानी दुर्गावती संग्रहालय

पुराने पुराने बस स्टैंड के पास भंवरताल गार्डन उद्यान स्थित संग्रहालय है दुर्गावती संग्रहालय का निर्माण डबल मंजिल है वह भूत एक  सभागार दीर्घाए शैव गैलरी, वैष्णव गैलरी, जैन गैलरी, इंटेक्स गैलरी, उत्खनन गैलरी, और जनजातीय आर्ट गैलरी है। जबकि कुछ कम महत्वपूर्ण संग्रह से आरक्षित नमूनों को संग्रहालय के खुले बगीचे में प्रदर्शित किया गया है ।

पिसनहारी की मढ़िया

पिसनहारी की मढ़िया दिगंबर जैन पंत का एक 500 साल पुराना बहुत प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है जो कि मेडिकल कॉलेज के समीप स्थित है।

           एक पौराणिक कथा के अनुसार इस प्रसिद्ध एक गरीब महिला द्वारा एक जैन सन्यासी की वाणी सुनने के बाद किया गया था।

डुमना नेचर रिजर्व पार्क

जिन लोगों को वाइल्ड लाइफ जैसे जंगली जानवर आदि को नजदीक से देखने का शौक है उनके लिए डुमना नेचर पार्क बहुत ही आकर्षण का केंद्र है यहां पर फैमिली के साथ भी जाया जा सकता है जो कि घूमने के लिहाज से बहुत ही सुंदर और नेचर को पास से महसूस करने के लिए बहुत ही सही जगह है।  

डुमना जबलपुर शहर से 10 किलोमीटर की दूरी पर है यह 1058  हेक्टेयर में फैला हुआ है यहां जंगली सूअर हिरण सियार और अन्य जंगली जीवो को आसानी से देखा जा सकता है यहां पर फैमिली के साथ कैंप लगाया जा सकता है।

ग्वारीघाट (नर्मदे हर)

यह जबलपुर की उन सभी प्रसिद्व जगहों में से एक है जहाँ आध्यात्मिक शांति और सुकून है माँ नर्मदा का यह तट अत्यंत ही आकर्षक है जहाँ हिन्दुओं ,साई बाबा के भक्तों के साथ साथ सिख धर्म के संस्थापक,गुरु नानक देव और एक प्रसिद्व सिख गुरूद्वारे के साथ लगा हुआ है, ग्वारीघाट एक अत्यंत लोकप्रिय पर्यटक स्थल बन गया है शाम के समय पूरे घाट में शाम की आरती के लिए नदी के किनारों पर दीप-दान के उपरान्त महाआरती का आयोजन किया जाता है यह आरती हरिद्वार में गंगा घाट की आरती जैसा अनुभूति देता है।

कचनार सिटी शिव मंदिर

जबलपुर में प्रसिद्द कचनार शहर स्थानीय लोगो और विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण और धार्मिक गंतव्य के लिए प्रसिद्द है यहाँ भगवान शिव की विशाल प्रतिमा जो कि 76  फिट 23  मीटर ऊँची है का निर्माण 2004 में किया गया था इसमें नीचे गुफा जिसमे भगवान शिव के शिव लिंगम कि प्रतिकृति है जिसे “ज्योतिर्लिंग” कहा जाता है । गुफा में लगभग 12 ज्योतिर्लिंगम हैं, जिन पर भगवान शिव की मूर्ति बनी हैं । इन 12 शिव लिंगम को पूरे भारत देश के विभिन्न मंदिरों से एकत्रित किया गया है ।

बरगी डेम

नर्मदा नदी पर बने 30 बांधों में से एक प्रमुख बरगी बांध भी है यह जबलपुर और उसके आस-पास के इलाकों में पानी का प्रमुख स्त्रोत्र है । इस बांध पर विकसित दो मुख्या सिंचाई परियोजनाएं है एक बरगी दिवदर्शन परियोजना और दूसरी रानी अवंतीबाई लोधी सागर परियोजना

                                मध्य प्रदेश द्वारा यहाँ एक रिसोर्ट भी खोला गया है जिसका अगला हिस्सा जलाशय और रिसोर्ट को एक असामान्य दृश्य प्रदर्शित करता है ।

यातायात के साधन

वर्तमान में यह आधुनिक शहर है जहाँ जबलपुर आने -जाने में किसी तरह की कोई कठिनाई या परेशानी नहीं है । देश भर में जबलपुर आने-जाने के लिए कई बसें (बस स्टैंड)दीनदयाल चौक,ट्रेनें (जबलपुर स्टेशन और मदन महल स्टेशन) और हवाई अड्डा (एयरपोर्ट) भी है जिसका नाम डुमना एयरपोर्ट है ।आप अपनी खुद की कार से भी आ सकते हैं और यहाँ ओला कैब्स भी आसानी से मिल जाती हैं ।

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