पचमढ़ी यात्रा

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hello everyone !!!
कहते हैं नया साल नयी उम्मीदें ,नयी शुरुवात और नए संकल्पों की खुशियां अपने साथ लाता है और जो सपने बीते साल में अधूरे रह गए थे, वो इस नए साल में उन्हें पूरा करने की नयी उम्मीदों और ऊर्जा का संचार करता है । मैं हूँ आपकी दोस्त लतिका कपूर और आज मैं इस नए साल में नए सफर की शुरुवात के साथ आपको लेकर चलती हूँ, पचमढ़ी की उन खूबसूरत वादियों में,जहाँ पचमढ़ी को ‘सतपुड़ा की रानी ‘ के नाम से पुकारा जाता है,जी हाँ मैं बात कर रही हूँ, मध्य भारत में स्थित मध्य प्रदेश राज्य के होशंगाबाद जिले के एक बेहद ख़ूबसूरत हिल स्टेशन की  । जहाँ ब्रिटिश शासकों के शासन के बाद से यह एक पचमढ़ी छावनी रहा है  ।
सतपुड़ा रेंज के मध्य 1100 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ यह हिल स्टेशन अत्यंत ही प्राकृतिक मनमोहक सुंदरता और इतिहास से परिपूर्ण है। पचमढ़ी भारत के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में से एक है, जिसमे प्राचीन गुफाएं हैं जो की बौद्ध काल के समय से शांत जलप्रपातों के साथ बसी हुई है ।
पचमढ़ी में कई लोकप्रिय झरने हैं जिनमें से बी फॉल, सिल्वर फॉल,अप्सरा विहार जलप्रपात, आदि प्रसिद्ध हैं । जैसा की मैं आपको अपने पिछले,सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व के अनुभव में बता चुकी हूँ, कि सतपुड़ा नेशनल पार्क की यात्रा के बिना पचमढ़ी का सफ़र पूरा ही नहीं माना जा सकता है । वन्यजीव अभ्यारण्य मध्य प्रदेश में सबसे अधिक लोकप्रिय स्थानों में से एक है
अभ्यारण्य एक समृद्ध और विविध पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा मन गया है। वन्यजीवों में तेंदुआ, बाघ, सांभर,चीतल, हिरन,भालू नील गाय का निवास है जहाँ सबसे दिलचस्प बात यह है कि टाइगर रिज़र्व होने के बावजूद उन कुछ क्षेत्रों में शामिल है जहां आप जिप्सी से बाहर जंगल का अनुभव ले सकते हैं ।

पचमढ़ी क्यों प्रसिद्ध है ?

अभ्यारण्य एक समृद्ध और विविध पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा मन गया है । वन्यजीवों में बाघ, सांभर,चीतल, हिरन,भालू नील गाय का निवास है जहाँ सबसे दिलचस्प बात यह है कि टाइगर रिज़र्व होने के बावजूद उन कुछ क्षेत्रों में शामिल है जहां आप जिप्सी से बाहर जंगल का अनुभव ले सकते हैं । यहाँ की वनस्पतियां भी समृद्ध है जिसमे साल, सागौन, भारतीय करौदा, महुआ , बांस और बेल कुछ ऐसे वनस्पति है जिन्हे यहाँ देखा जा सकता है पचमढ़ी अपनी आयुर्वेदिक दवाओं और शहद के लिए प्रसिद्ध है जो इसे यादगार बनती है

पचमढ़ी में क्या प्रसिद्ध है ?

पचमढ़ी अपनी आयुर्वेदिक दवाओं और शहद के लिए प्रसिद्ध है जो इसे यादगार बनती है ।

पचमढ़ी का मौसम और तापमान

चूँकि पचमढ़ी एक हिल स्टेशन है तो सबसे अच्छा समय यहाँ घूमने का अक्टूबर से फरवरी तक का है इन दिनों जलवायु सुखद रहती है। मार्च से जून में भीषण गर्मी के साथ तापमान 35 डिग्री तक जा सकता है और जुलाई से सितम्बर के समय धुंध से आच्छादित भीगे पहाड़ों भव्य रूप के साथ भरी वर्षा का आनंद ले सकते हैं।

पचमढ़ी होटेल्स और रिसॉर्ट्स

पचमढ़ी में होटल्स और रिसॉर्ट्स में ठहरने के कई विकल्प हैं जो आपकी पसंद और बजट के अनुकूल हैं ।

पचमढ़ी दर्शनीय स्थल

बी फॉल मानसून में पचमढ़ी घूमने का यह सबसे अच्छा स्थान है, बी फॉल सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल है,जहाँ झरना न केवल आकर्षित लगता है बल्कि यह पीने के पानी का एक प्रमुख स्त्रोत भी है । जिसकी सुरक्षा के लिए यहाँ नहाना या पानी में गन्दगी फ़ैलाने पर सख्त मनाही है, जिस पर जुर्माना भी निर्धारित किया गया है ,अप्सरा विहार से यह केवल 10 मिनट की पैदल दूरी पर है जहाँ जिप्सी सफारी से जाना ही बेहतर होगा क्योंकि सफारी के बाद आपको काफी पैदल यात्रा करनी पड़ती है जिसमे नीचे फॉल के पास जाने के लिए लगभग 400 सीढियाँ चढ़ना-उतरना पड़ता है जिसमे 1-2 घंटे का समय लग सकता है I

डचेस फॉल – यह लगभग 100 मीटर का जलप्रपात है, जो कि रीछगढ़ की तरफ जाने वाले रास्ते पर 4 किलो मीटर जाने वाला एक चुनौतीपूर्ण मार्ग है, जहाँ आपको पैदल पथरीले मार्ग से यात्रा तय करनी होगी, जहाँ झरने के समीप पहुंचने में आपको 3-4 घंटे के लगभग समय लग सकता है । 

सिल्वर फॉल / बिग फॉल / रजत प्रपातरजत जलप्रपात भारत में 30 वां सबसे ऊँचा जलप्रपात है यह सबसे लोकप्रिय जलप्रपातों में से एक है । यह प्रपात सिल्वर फॉल और बिग फॉल के नाम से भी प्रसिद्ध है इस झरने की खासियत यह है की सूर्य की किरणों में इस जलप्रपात के कण चांदी की तरह चमकते हैं जो की मानसून में सबसे रोमांचक दृश्यों में से एक है । यहाँ की दूरी तय करने में लगभग 2 घंटे का समय लगता है ।

धूपगढ़धूपगढ़ सतपुड़ा रेंज का सबसे प्रसिद्द और सबसे ऊँचा स्थान है जिसकी ऊंचाई लगभग 1352 मीटर है, जहाँ से आप एक ओर सुबह सूर्योदय तो दूसरी ओर शाम के समय सूर्यास्त का बेहद खूबसूरत नज़रों का लुफ्त उठा सकतें हैं।

प्रियदर्शिनी पॉइंट – इसका इतिहास कुछ इस तरह दर्शाता है की फोर्सिथ पॉइंट की खोज कप्तान फोर्सिथ ने सत्र 1857 में की थी,जहाँ का नज़ारा पहाड़ों और वादियों की परतें बादलों की धुंध से ढकी रहती हैं ।

जटाशंकर गुफा – ऐसा माना जाता है की भगवान शिव का पहला स्थान कैलाश है,तो जटाशंकर धाम दूसरा हुआ करता था, यह स्थान सैकड़ों चट्टानों के बीच बसा हुआ है जहाँ इन चट्टानों से हर समय पानी का रिसाव बना रहता है। पौराणिक कथा के अनुसार स्वयं को भस्मासुर से बचने के लिए शिवजी ने जटाशंकर में ही शरण ली थी।

चौरागढ़ समुद्री तलहटी से लगभग 4200 फीट की ऊंचाइयों पर स्थित चौरागढ़ शिव मंदिर ,महंत गरीबदास महाराज के अनुसार माता पार्वती ने महाराष्ट्र में एक बार मैना गौंडानी का रूप धारण किया था यही वजह है की महाशिवरात्रि में महाराष्ट्र से सबसे अधिक संख्या में भक्त महाराष्ट्र से यहाँ दर्शन के लिए आते हैं । यहाँ आने के लिए काम से काम 2-3 घंटे आने में और उतना ही समय वापस जाने में लगता है । यहाँ की यात्रा के लिए पूरा एक दिन का समय निकाल कर आना ही सही होगा, जिसमें आपको 4-5 किलो मीटर की यात्रा के बाद 1300 सीढ़ियां चढ़कर मंदिर तक पहुंचना रहता है ।

गुप्तमहादेव – यह गुफा बड़े महादेव की गुफाओं के ओर जाने वाले मार्ग के सामान है जो की 40 फ़ीट लम्बी सकरी गुफा है । यह इतनी संकीर्ण है कि जिसमे एक बार में सिर्फ 8 ही लोगो का प्रवेश समायोजित है ।

पांडव गुफा पांडव गुफा में रॉक-कट बौद्ध मंदिरों का अत्यंत आकर्षक समूह स्थापित है ।यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है,और यह स्थान उन सभी पर्यटकों के लिए सबसे दिलचस्प है, जो धार्मिक महत्त्व में रूचि रखते है।ऐसी पौराणिक कथा है की 9वी शताब्दी में इन मंदिरों को निर्वासन अवधि के दौरान पांडवों को एक आश्रम के रूप में दिया गया था ।

कैथोलिक चर्च – यह चर्च 19वी शताब्दी में 150 साल से भी अधिक समय पुराण है,जो की एक शांतिपूर्ण, पुराने ज़माने के सौंदर्यशास्त्र से परिपूर्ण चर्च है चूँकि पचमढ़ी में कैथोलिक परिवार कम हैं इसलिए यह सिर्फ रविवार को ही खुलता हैं ।

तैरता पत्थर – ऐसा कहा जाता है,इसी पत्थर से रामसेतु बनाया गया था इसका दूसरा नाम नल-नील सेतु भी है ।

भोपाल से पचमढ़ी की दूरी – भोपल से पिपरिया तक के लिए कई ट्रेनें मिल जाएगी । पचमढ़ी से भोपाल हवाई अड्डा निकटतम है । भोपाल से पचमढ़ी 207 किलो मीटर का रास्ता है ।
इंदौर से पचमढ़ी की दूरी – इंदौर से पचमढ़ी 400 किलो मीटर है ।
जबलपुर से पचमढ़ी की दूरी – जबलपुर से पचमढ़ी लगभग 265 किलो मीटर की दूरी है ।
पिपरिया से पचमढ़ी की दूरी – पिपरिया से पचमढ़ी 55 किलो मीटर पर है ।आप पिपरिया से ऑटो या कार भी बुक कर सकतें है ।

पचमढ़ी में अपनी एक सहज यात्रा की योजना बनाने से पहले कुछ बातों पर विचार करना चाहिए, यहाँ कुछ टिप्स और सुझाव दिए गए है

1.जितना हो सके उतना उचित और आरामदायक जुते पहनें।
2. पानी की बोतल और खाने पीने का सामान साथ ले जाएं क्योंकि विश्वसनीय भोजन पानी का स्त्रोत नहीं है।

3. अगर आपकी मांसपेशियों में किसी तरह का दर्द है तो यात्रा में आगे बढ़ने से बचें ।
4. ग्रुप में ही जाएँ और अंधेरा होने का रिस्क न ले ।
5. अपने सामान को सुरक्षित रूप से अपने साथ रखें, वहां के बंदरों को कुछ भी खाने की सामग्री देने से बचें अन्यथा वह आपका सामान आपसे छुड़ा कर भाग भी सकते है और आपको नुकसान भी पहुंचा सकते हैं ।
6. जितना हो सके अपने साथ नगदी रखें वहां एटीएम की सुविधाएं सीमित हैं ।
7. जल धाराओं से पानी पीने का प्रयास बिकुल न करें चाहे पानी कितना भी साफ़ और आकर्षक हो।
8. यहाँ आप जीपीएस के भरोसे बिलकुल भी न रहे, हिल स्टेशन होने के कारण यहाँ नेटवर्क बिलकुल भी नहीं रहता ।

  1. हमेशा वन्य जीवों से एक सुरक्षित दूरी बनायें रखें ।
  2. आप सफारी या फिर किराए पर बाइक या कोई भी दो पहिया वाहन वहां से ले सकते हैं, सफारी से आपको घाटियों और जंगलों में घूमने के लिए सुविधा होगी और यह सुरक्षित भी है, परन्तु आप अगर स्वयं की कार या बाइक ले जाना चाहें तो एक निश्चित स्थान के बाद आगे का रास्ता आपको पैदल तय करना पड़ सकता है । सफारी आपको लगभग 1500-1700 में मिल जाएगी जिसका आपको 2-3 दिन का परमिट बनवाना पड़ता है प्रवेश के लिए और बाइक 300-400 तक मिल जाएगी ।
  3. किराये पर दो पहिया वहां लें तो लेने के पूर्व बाइक का फुल वीडियो ज़रूर बना लें ताकि उसकी डैमेज होने वाली जवाबदारी से आप बच सकें । जरुरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड,ड्राइविंग लइसेंस जरूर से साथ रखें ।

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